छत्तीसगढ़ में राजकीय शोक का खुला उल्लंघन

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय ने एक बार फिर दी छत्तीसगढ़ सरकार को खुली चुनौती....
 
रायपुरl  छत्तीसगढ़ की जनता प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री श्री अजीत जोगी जी के दिव्य आत्मा के शांति की प्रार्थना अभी पूरी भी नहीं कर पाई है , पूरा प्रदेश अब भी जहां शोक भरे वातावरण में डूबा नजर आ रहा है तो वही दूसरी ओर कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्हें राजकीय शोक से कोई लेना देना नहीं है| इस यथार्थ को पूर्णता सिद्ध करता नजर आया छत्तीसगढ़ का एकमात्र विवादित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय| यहां के संघी विचारधारा वाले प्रोफेसरों और नये नवेले कुलपति बलदेव भाई शर्मा ने एक बार फिर  सरकार के आदेश को न मानकर सीधे टक्कर देने की कोशिश ही नहीं की बल्कि इसे सरेआम साकार कर दिखाया है| 

यह वही विश्वविद्यालय है जहां विद्यार्थियों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाली,सच और झूठ की लड़ाई लड़ने वाली, समाज के लिए अस्त्र साबित होने वाली व देश का चौथा स्तंभ कही जाने वाली पत्रकारिता का पाठ्यक्रम  संचालित किया जाता है|


  वह पत्रकारिता जो विद्यार्थियों को सच के लिए लड़ने और कलम से क्रांति लिखने की सीख देती है, किंतु यहां के कई प्रोफेसर स्वयं ही फर्जी और बेईमान है| इन्हें न तो किसी की मातम का गम है और न ही 

उचित-अनुचित की परवाह| यही वजह है कि इन्होंने सरेआम एक बार फिर न नैतिकता के विरोध में जाकर अपना हित तय किया है| बल्कि इनकी इस गतिविधि ने मानवता को भी शर्मसार कर दिया है|  विश्वविद्यालय की इस घटना से न केवल विश्वविद्यालय बल्कि सजग पत्रकार साथीयों  की भी किरकिरी सरेआम हुई है | 


   विदित हो कि 31 मई 2020 को विश्वविद्यालय द्वारा राजकीय शोक घोषित होने के बावजूद राष्ट्रीय वेबिनार कोरोना महामारी के दौरान डिजिटल मीडिया की भूमिका विषय पर कार्यक्रम का आयोजन  सरकारी इंतजामों के साथ बड़े ही उत्सुकता के साथ मनाया जा रहा था| 

वेबीनार का आयोजन ई-मीडिया के माध्यम से लाइव हो रहा था जिसमें देशभर के शोधार्थी, प्रोफेसर और बुद्धिजीवी जुड़े हुए थे| अचानक ही उनके समक्ष वह दृश्य आ गया जिससे वे सभी अनजान थे, कि जिस प्रदेश को अभी अपने होनहार प्रथम मुख्यमंत्री को खोए हुए 2 दिन भी नहीं हुए, उसी प्रदेश के एक सरकारी शैक्षणिक संस्थान में कार्यक्रम का आयोजन राजकीय शोक  को ताक पर रखते हुए सहजता के साथ किया जा रहा था| 

   संघ का आत्मपरिसर कहे जाने वाली कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के इस वेबीनार कार्यक्रम के लिए भी वक्ता के रूप में संघ के विचारधारा वाले व्यक्तियों को प्राथमिकता से आमंत्रित किया गया था| कार्यक्रम के विवरण ब्रोशर के अनुसार यह वेबीनार दो सत्रों में आयोजित होना था जिसमें प्रथम सत्र का आयोजन सुबह 11:00 बजे से  12:30 बजे तक व द्वितीय सत्र का आयोजन  1:00 बजे से  2:00 बजे तक रखा गया था | 

कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से  मिली जानकारी के अनुसार जब यह विरोध जताया गया तब तक प्रथम सत्र जारी रहा। जिसमें संघ के वक्ताओं में से प्रो. जयंत सोनवलकर कुलपति मध्यप्रदेश भोज. मुक्त विश्वविद्यालय  भोपाल, डॉ.मानस प्रीतम गोस्वामी, विभागाध्यक्ष पत्रकारिता विभाग केंद्रीय विश्वविद्यालय तमिलनाडु, वरिष्ठ पत्रकार शैलेंद्र तिवारी नई दिल्ली और प्रोफेसर पुष्पेंद्र पाल सिंह संपादक रोजगार और निर्माण भोपाल अपनी बात किए जा रहे थे।  कुछ अन्य वक्ता अपने वक्तत्व के इंतजार में थे| 

इस दौरान वेबीनार के लाइव स्क्रीन में सजग छात्रों द्वारा फ्लैग रेस करके  समस्या से अवगत कराया गया।

साथ ही सजग छात्रों द्वारा विश्विद्यालय जाकर विरोध दर्ज कराया गया।  विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों द्वारा विवि के प्रोफेसरों, नये नवेले कुलपति के विरोध में नारे लगा रहे थे, तो वही विरोध प्रदर्शन का दृश्य भी वेबीनार के ऑनलाइन लिंक में प्रदर्शित होने लगा था | प्रदर्शित दृश्य में यह स्पष्ट देखने को मिल रहा था कि विद्यार्थी विश्वविद्यालय प्रबंधन से प्रदेश में राजकीय शोक होने के चलते कार्यक्रम को बंद करने की मांग कर रहे हैं| 

इसके बाद विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने लाइव जुड़े दर्शकों को अवगत कराया गया कि यहां के शिक्षकगण व प्रोफेसर आदि विचारधारा के इतने भूखे हो चुके हैं कि किसी व्यक्ति के मातम में भी कार्यक्रम का आयोजन कर लेते हैं| 

एक बार फिर ऐसी गतिविधि के माध्यम से पत्रकारिता विश्वविद्यालय द्वारा छत्तीसगढ़ की सरकार को अंगूठा दिखाने का सार्थक कार्य किया गया है, 

  ज्ञात हो कि कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक विभाग के तत्वाधान में किया जा रहा था| कार्यक्रम आयोजक  इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.नरेंद्र त्रिपाठी थे| कार्यक्रम की अध्यक्षता  विश्वविद्यालय के  कुलपति  प्रोफेसर बलदेव भाई शर्मा द्वारा किया जाना था|  समस्त संबंधित जनों के नाम को विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित वेबीनार के ई-ब्रोशर में स्पष्ट देखा जा सकता है| एक ओर जहां विश्वविद्यालय के अतिथि प्राध्यापक, असिस्टेंट प्रोफेसर के द्वारा सरकार के विपरीत जाने का साहसी कदम इस पत्रकारिता विश्वविद्यालय में एक बार फिर देखने को मिलता है,तो वही संगी विचारधारा वाले कुलपति बलदेव भाई शर्मा के पुर्न आगमन से इन शिक्षकगण और प्रोफेसरों में आत्मीय बल का प्रोत्साहन भी ऐसी गतिविधि के माध्यम से स्पष्ट देखा जा सकता है|  
    अब लोग कहने लगे हैं कि क्या प्रदेश की सरकार इतनी ज्यादा बेबस हो गई है कि बार-बार एक छोटे से विश्वविद्यालय द्वारा इन्हें मुंह की खानी पड़ रही है? वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश में सरकार परिवर्तित होते ही लॉकडाउन कार्यकाल के दौरान भी विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की छटनी कर अपनी विचारधाराओं के व्यक्तियों को कुलपति पद में नियुक्त करके मध्यप्रदेश की सरकार ने अपने शक्ति का खुला प्रदर्शन किया है| लोगों में अब यह तक कहा जाने लगा है कि छत्तीसगढ़ की सरकार के पास न तो कोई  रणनीति है और न ही इसके पास उचित निर्णय लेने का साहस है|


हनी बग्गा
प्रदेश सचिव
NSUI

श्री राम वन गमन मार्ग के नाम से सांप्रदायिक भावना बढ़ाने एवं राजनीतिकरण करने के नाम से एफ आई आर दर्ज करने की शिकायत

श्यामा देवी साहू एवं खूब लाल ध्रुव द्वारा ओझि राजनीति करते हुए
पिछले दोनों ग्राम तुमरा बहार के आश्रित ग्राम  बिश्रामपुर के "तुमा" में जय बूढ़ादेव अनुसंधान केंद्र द्वारा आयुर्वेदिक अनुसंधान केंद्र स्थापन हेतु  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिताजी श्री नंद कुमार बघेल द्वारा भूमि पूजन  कार्यक्रम को बौद्ध धर्म एवं राम लक्ष्मण मन्दिर से जोड़कर सांप्रदायिक राजनीति कर रहे हैं, जिस की हम विश्रामपुर एवं तुमा खुर्द के समस्त ग्रामवासी कड़ी निंदा करते है 
और उनके के द्वारा लगाया गया आरोप राम वन गमन का बोर्ड हटाकर बौद्ध विहार लिखा गया यह सब बेबुनियाद है
 कि नंद कुमार बघेल के द्वार ग्रामीणों को बरगला के बौद्ध धर्म का प्रचार करना यह सब गलत बात है उनका आने का उद्देश्य *बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार बिल्कुल ही नहीं था* ये सब झूठे दोषारोपण की राजनीति है सम्मानीय व्यक्ति के ऊपर झुठा आरोप
जिस समिति के द्वारा यह लोग यहां की शिकायत कर रहे हैं उस  समिति में ग्राम से कोई भी व्यक्ति सदस्य नहीं है
 विकास कार्यों के भूमि पूजन के आमंत्रण में आसपास गांव के आदिवासी समाज प्रमुख द्वारा बस्तर जड़ी बूटी आयुर्वेद अनुसंधान केंद्र की स्थापना के लिए भूमि पूजन का कार्यक्रम किया गया था।
 राम राम टेकरी रामेश्वरम धाम भजन विकास समिति ऐसा कोई भी संस्था हमारे गांव नहीं है हम इसका खंडन करते हैं

 *ग्राम बिश्रामपुर के तुमा में पर्यटन संबंधी हो रहे विकास कार्य को राम वन गमन मार्ग से जोड़कर राजनीति की जा रही है* जिसका हम समस्त ग्रामवासी घोर विरोध करते हैं एवं आज समस्त ग्राम प्रमुखों द्बारा पूर्व जिला पंचायत सदस्य *श्रीमती श्यामा देवी साहू एवं क्षेत्र क्रमांक 10 के जिला पंचायत सदस्य खूब लाल ध्रुव* के ऊपर राम वन गमन मार्ग के नाम से राजनीति कर सांप्रदायिक भावना बढ़ाने के नाम से
पुलिस अधीक्षक एवं अपर कलेक्टर से एफ आई आर दर्ज करने की मांग करते है 

 *समस्त ग्रामवासी ग्राम विश्रामपुर "तुमाखुर्द" जिला धमतरी।*

पदोन्नति जारी होने से अनुसूचित जाति व जनजाति के संवैधानिक हितों की हो रही है अनदेखी

सभी शासकीय विभागों में अनारक्षित बिंदु पर पदोन्नति जारी होने से अनुसूचित जाति व जनजाति के संवैधानिक हितों की हो रही है अनदेखी

VINOD  KOSHLE 

छत्तीसगढ़ राज्य के सभी विभागों में पदोन्नति सूची लगातार जारी हो रही है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पदोन्नति में आरक्षण नियम 2003 के उपनियम 5 को 2 माह के लिए स्टे प्रदान किया गया था। राज्य शासन के महाधिवक्ता द्वारा कोर्ट में पदोन्नति में आरक्षण नियम 2003 के उपनियम 5 में आंशिक त्रुटि माना था और इसे युद्ध स्तर पर संशोधन कर नियम प्रतिस्थापित कर नए नियम फ्रेम करने कोर्ट में कहा था । कोर्ट में सुनवाई 16 अप्रैल के लिए निर्धारित की गई थी । 21 मार्च से कोरोना के वजह से लॉक डाउन की स्थिति निर्मित हो गई । पदोन्नति में आरक्षण केस की सुनवाई आगे नहीं बढ़ पाई और आज पर्यंत कोर्ट में विचाराधीन है। लॉक डाउन की स्थिति में सभी विभागों ने लगातार अनारक्षित बिंदु पर पदोन्नति देना शुरू कर दिया है जबकि छत्तीसगढ़ पदोन्नति नियम 2003 के उप नियम 5 पर ही रोक लगी है बाकी सारी कंडिकाएं अभी भी लागू हैं । विभागों में रिक्त पदों को अनारक्षित श्रेणी में ही भरने के लिए किसी भी प्रकार के पदोन्नति नियम नहीं बने है।*अनुसूचित जाति जनजाति रोस्टर बिंदु रोक का मतलब एससी एसटी के पदों को खत्म करना नहीं है बल्कि विद्यमान पदोन्नति नियमों के अनुसार रिक्त पदों को अनारक्षित ,अनुसूचित जाति व  जनजाति  श्रेणी में बांटकर पदोन्नति देते हुए अनुसूचित जाति व जनजाति के पदों को सुरक्षित रखना चाहिए था। इस तरह नियमों का पालन विभागों द्वारा नही किया जा रहा है। सोशल जस्टिस लीगल सेल  के द्वारा  सामान्य प्रशासन विभाग , मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन व डीजीपी पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर को तीन बार पत्र के माध्यम से अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद सारे पदों पर अनारक्षित बिंदु में पदोन्नति देने की कार्यवाही अनवरत जारी है । विभागों द्वारा समस्त पद अनारक्षित श्रेणी में भरना अनुसूचित जाति व जनजाति के संवैधानिक अधिकारों का हनन है। इसके साथ ही सभी विभागों को पदोन्नति नियम 2003 के नियमानुसार बैकलॉग पदों पर भी पदोन्नति प्रदान करनी थी। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा छ ग.लोक सेवा  पदोन्नति नियम 2003 के उप नियम को 5 को नए सिरे से प्रतिस्थापित करना प्रक्रियाधीन है। लगातार पदोन्नति अनारक्षित बिंदु पर भरने से अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए रिक्त पद नहीं बच पाएंगे।परिणामस्वरूप अनुसूचित जाति और जनजाति के अधिकारी कर्मचारियों को पदोन्नति के लिए कई वर्ष इंतजार करने पड़ सकते हैं। सबसे ज्यादा पुलिस विभाग द्वारा पदोन्नति सूची जारी की जा रही है ।
*प्रदेश भर में 1 लाख से अधिक अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के अधिकारी कर्मचारियों द्वारा सभी विभागो के कुल रिक्त पदों में से अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए पद संरक्षित करने  एवं पदों को संरक्षित करने की सूचना सार्वजनिक करने मांग की जाती है। विभागों द्वारा रिक्त सारे पदों को अनारक्षित श्रेणी में भरने के दुष्चक्र से 1 लाख से अधिक अनुसूचित जाति व जनजाति अधिकारी कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। हम लॉक डाउन का पालन करते हुए केवल पत्र व्यवहार से विभागो को अवगत करा रहे है। हम कोई विरोध प्रदर्शन नहीं करना चाहते हैं । यदि हमारी जायज मांगों को अनदेखा किया जाता है तो हम धरना प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी ।उक्त जानकारी सोशल जस्टिस लीगल सेल संगठन के कोऑर्डिनेटर विनोद कुमार कोसले द्वारा दी गई है।
✍🏻 सोशल जस्टिस लीगल सेल

2024 के लोकसभा चुनाव में पिछड़े वर्ग की विशेष भूमिका होगी

2024 के लोकसभा चुनाव में पिछड़े वर्ग की विशेष भूमिका होगी 
नंद कुमार बघेल
राष्ट्रीय मतदाता जागृति मंच के अध्यक्ष श्री नंद कुमार बघेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब किसी भी चुनाव में जीत नहीं पाएंगे । क्योंकि वह जितना झूठ बोल सकते थे बोल चुके । जनता उनके झूठ को समझ चुकी है। श्री नरेंद्र मोदी मोहन भागवत के साथ है और श्री मोहन भागवत घोर ब्राह्मणवादी हैं । वह इस देश के पिछड़े वर्ग को गर्व से कहो हिंदू हैं कहकर वोट लेना चाहते हैं। लेकिन पिछड़ा वर्ग को कोई भी अधिकार नहीं देना चाहते। आर एस एस के मुखिया कोई पिछड़े वर्ग का नहीं बनेगा ना ही महिला बनेगी। केवल ब्राह्मण बनेगा। वह भी चितपावन ब्राह्मण। वे पिछड़े वर्ग को आर एस एस का कार्यकर्ता जरूर बनाएंगे। आर एस एस का सभी प्रकार के हमाली पिछड़ा वर्ग के लोग करेंगे । और उनको ना नौकरी में स्थान होगा और ना ही कोई पद प्रतिष्ठा मिलेगी । यदि धोखे से पिछड़ा वर्ग का विधायक, एससी एसटी के विधायक सांसद बन भी जाए । तो लोकसभा, राज्यसभा , विधानसभा में अपने समाज के बारे में उन्हें बोलने का कोई अधिकार नहीं होता। यदि बोलने का अधिकार की मांग करेंगे हैं तो उन्हें पार्टी से निकाल दिया जाएगा।
श्री बघेल ने कहा कि यह सब उपरोक्त बातें निराशाजनक है। लेकिन आशा जनक यह है कि आज हमारी लड़कियां पड़ रही हैं । और हर क्षेत्र में वह टॉपर हैं। जब लड़कियां मां बनेगी, घर की प्रमुख बनेगी, तब नई क्रांति आएगी। और पत्थर के भगवान को स्वयं नहीं पूजेगी और समाज को नहीं पूजने देगी। चीनी कोरोना एवं मोदी करोना ने हमें समझा दिया है कि एससी एसटी ओबीसी और अल्पसंख्यक के मंदिर मस्जिद का विचार बिल्कुल गलत है । सारे मंदिरों के भगवान करोना को समाप्त नहीं कर सके। एससी एसटी ओबीसी के लोग मंदिर में चढ़ावा देना बंद कर दिए हैं। भगवान ने अपने पुजारियों का पेट पालना बंद कर दिए हैं। ब्राह्मण पुजारी चढ़ोतरी नहीं होने के कारण सरकार से  क्षतिपूर्ति की मांग रहे हैं । 
हम तो मोहन भागवत और मोदी से प्रार्थना करते हैं कि यदि किसी कारण से पुजारी का निश्चित आए नहीं आता है तो भारत सरकार उन्हें मुआवजा दे। इसके साथ प्रधानमंत्री मोदी तेली होने के कारण भारत के समस्त मंदिरों का राष्ट्रीयकरण कर दें। और  मंदिर के सोने चांदी को देश के खजाने में शामिल कर दें। तो देश आर्थिक संकट से बच पाएगा और मोदी जी क्योंकि तेली है इसलिए इस देश के मूल निवासी हैं। वह मोहन भागवत के आज्ञाकारी प्रधानमंत्री ना बने। जब गंगा से वोल्गा जाने की बात होगी तो नरेंद्र मोदी को वोल्गा नहीं भेजा जाएगा। वोल्गा जाने के लिए मोहन भागवत ही होंगे।
 रिपोर्ट संजीव 29 अप्रैल 2020

मनुवादी गुलाब कोठारी पत्रिका न्यूज़ के मालिक होश में आओ

लेखक विनोद कोसले

हम विनोद कोसले का यह महत्वपूर्ण लेख प्रकाशित कर रहे हैं जिसमें गुलाब कोठारी के पत्रिका में प्रकाशित संपादकीय दिनांक 28 अप्रैल 2020 का जवाब दिया गया है

     गुलाब कोठारी जी सम्पादक पत्रिका न्यूज आपकी लेख पुनर्विचार आवश्यक का जवाब आशा है अपनी सम्पादकीय में स्थान देंगे।
आज दिनांक 28 अप्रैल 2020 को आपने आरक्षण के मुद्दे पर
पुनर्विचार आवश्यक लेख लिखा। आपकी लेखन से देशभर के अनुसूचित जाति जनजाति और पिछड़ा वर्ग समुदाय के लोग आहत हुए है।आपने अनुचित तरीके से उद्धरण देकर आरक्षण पर समीक्षा की बात की है।

उच्चतम न्यायालय ने अपने चर्चा के बिंदु में आरक्षण पर समीक्षा की बात कही लेकिन केस का मुद्दा अनुसूचित क्षेत्रों में 100%  आरक्षण देने पर रोक लगाने को लेकर था। अनुसूचित क्षेत्रों में  100% आरक्षण क्यों नही दिया जा सकता है ।वहां उनकी शत प्रतिशत आबादी रहती है। 5वी अनुसूची अनुसूचित क्षेत्र में राज्यपाल को विशेषाधिकार सँविधान में उपबन्धित है।जिसे स्थानीय भाषा की ज्ञान नही,वह कैसे वहां उचित संप्रेषण कर पाएंगे।क्या गैर अनुसूचित लोग उनकी समस्याओं से अवगत हो पाएंगे?बिल्कुल नही।अनुसूचित क्षेत्र में भाषायी समस्या होती है।  बस्तर छत्तीसगढ़ आकर देखिए। पांचवी अनुसूची क्षेत्रों में बाहरी लोगों का ज्यादा दखल बढ़ गए हैं।हम अनुसूचित क्षेत्र में 100%प्रतिनिधित्व की मांग करते है।जल जंगल जमीन हमारी है।हम सदा प्रकृति पूजक रहे है।

आपने आरक्षण को आत्मा का विषय कहा है ।आरक्षण कोई गरीबी उलमूलन कार्यक्रम, रोजगार गारंटी योजना या फिल्म के लिए सीट आरक्षण नही है,यह एक प्रतिनिधित्व है ।आपको उदाहरण देकर अवधारणा स्पष्ट करने की कोशिश करता हूँ,शायद मेरी लेख पढ़ने के बाद आपकी विचार बदल जाए।मान लीजिए यदि संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधित्व के लिए पोस्ट निकलती है तो इस बात का फर्क नहीं पड़ता कि भारत में चुना जाने वाला व्यक्ति अमीर है या गरीब ।लेकिन उसका भारतीय होना जरूरी है ।साथ ही यह भी समझने की कोशिश करें कि संयुक्त राष्ट्र ने एक जॉब इसलिए नहीं निकाली कि उसे किसी एक भारतीय की गरीबी इस जॉब से मिटानी हैं बल्कि इसलिए निकाली ताकि कोई चुना हुआ व्यक्ति भारत की आवाज संयुक्त राष्ट्र में रख सकें ।अब यदि व्यक्ति संयुक्त राष्ट्र के निर्धारण किए गए मापदंडों को पूरा करता है तो बाकी के भारतीय क्या यह कह सकते हैं कि चुना गया भारतीय बाकि भारतीयों को आगे बढ़ने नहीं दे रहा है?यही बात भारत में आरक्षण के मामले में हैं।

इतिहास के पन्नों में झांक कर देखिए प्रतिनिधित्व सदियों से सामाजिक व शैक्षिक रूप से पिछड़े वंचित व सताए हुए अनुसूचित जाति जनजाति और पिछड़े वर्ग के लोगों को समान अवसर प्रदान करने की एक व्यवस्था है। समान अवसर इसलिए क्योंकि रेस की लाइन एक नहीं है ।इसलिए रेस के लाइन एक करने व विशेष अवसर प्रदान करने प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की गई है। जिसे देशभर में आरक्षण आरक्षण के नाम से समीक्षा की बात की जा रही है।

 हम भी रोज-रोज आरक्षण की समीक्षा बातों को सुनकर अब हम भी समीक्षा चाहते हैं ।लेकिन शर्त है पूरे भारतवर्ष की सारी संपतिया पूरे लोगों में बराबर बांट दी जाए और जिन लोगों ने जाति की व्यवस्था बनाई ।उनको केवल 1 पीढ़ी को  शिक्षा से वंचित रखा जाए।तब रेस की लाइन एक होगी।और मुकाबला भी बराबर का होगा।

मनुष्य और पशु पक्षी की विकास मैं थोड़ी भिन्नता है दोनों का चलन पाद व प्रजनन अलग अलग है तो फिर कैसे मनुष्य पक्षी जन्म ले सकता है। एक निश्चित उम्र के बाद मनुष्य व पशु पक्षी मृत हो जाते है।मृत पश्चात शरीर जटिल कार्बनिक पदार्थो से सरल कार्बनिक पदार्थो में अपघटित हो जाता है।यह विकास का क्रम है।
दो समान जीवधारियों से प्रजनन पश्चात सन्तति उतपन्न होती है।हमने डार्विन व मेंडल के सिद्धांत में पढ़ा है।।

राष्ट्र की समुचित विकास के लिए ही भारतीय संविधान में सभी भारत के नागरिकों के लिए समान अवसर प्रदान किए ।सँविधान में 'किसी व्यक्ति को धर्म मूल वंश जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता,उपबन्धित है।
संविधान निर्माण के पूर्व हजारों वर्षों से जन्म के आधार पर भेदभाव होता था। तेली के तेली,  चमार के घर चमार ,लोहार के घर लोहार ,खटीक के घर खटीक,नाई के घर नाई, गोंड के घर गोंड़  पैदा होता था ।संविधान निर्माण के बाद प्रतिनिधित्व व अवसर की समता पश्चात एक चमार का बेटा आईएएस भी बनने लगा।  मात्र आजादी के 70 वर्षों बाद अब आरक्षण की समीक्षा की बात होने लगी।हमारे पूर्वजो ने तो सदियां त्रासदियां झेलीं है।मुँह से उफ्फ तक नही निकली।

इतिहास उठाकर देखें जातियां किसने बनाएं? जाति में ऊंच-नीच भेदभाव किसने पैदा किए? जवाब आपको पता है।

 मंडल कमीशन का इतिहास लिखता हूं, 1953 चौहान में काका कालेकर आयोग से शुरू हुआ सफर 1990 में मंडल कमीशन के रूप में पिछड़े वर्गों के पहचान के लिए 3743 जातियां की चिन्हांकित किए। काफी मुश्किलों से ओबीसी आरक्षण बिल पास हुआ।यह बिल भी कोर्ट में चैलेंज हुआ।कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण सही माना। जब भी नई वैकेंसी रिक्रूट होती है ।तो उस वैकेंसी को प्राप्त करने के लिए कई शर्ते होती हैं। तब कहीं जाकर कोई भी व्यक्ति उस पद के काबिल होता है ।क्या कभी आज तक ऐसा हुआ है ,कि किसी आठवीं पास एससी एसटी ओबीसी को आईएएस आईपीएस बनाए गए हो?हमने सारे सरकारी पदों को प्राप्त करने के लिए उसके लायक योग्यता हासिल की है।

 गांव में निवास करने वाले एससी एसटी ओबीसी समुदाय आज भी  कठिन परिश्रम से अनाज उत्पन्न कर रहे हैं ।जिसका उपभोग देश विदेश के लोग कर रहे हैं ।आजादी के 70 वर्ष बाद भी देश की उच्च शिक्षा संस्थानों में महज sc.st.obc की भागीदारी मात्र कुछ प्रतिशत है। सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट में आरक्षित वर्गों की भागीदारी कुछ एक या नही के बतौर है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया ,बिजनेसमैन,मॉल फैक्ट्रियां के मालिको की संख्या
SC, ST ओबीसी की  कितनी है?
रिकॉर्ड आपके पास मौजूद है।

आरक्षण ने हिंदुओं को नहीं बांटा। बल्कि  हिंदू पहले से ही हजारों जातियों में बैठे थे ।यह कैसी व्यवस्था है एक दूसरे के ऊपर पानी भी पड़ जाए तो ताकतवर जातियां कमजोर वर्गों के खून की प्यासी हो जाती है ।मध्य प्रदेश की घटना याद होगी उच्च जातियों के खेत में वाल्मीकि समुदाय अनुसूचित जाति के बच्चे खेत में टॉयलेट के लिए गए तो तथाकथित उच्च कहे जाने वाले जातियों के ठेकेदारों ने लाठी से पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी।
 रोहित वेमुला की आत्महत्या,पायल तड़वी की आत्महत्या हम आज भी नहीं भूले हैं ।क्या यह टुकड़े आरक्षण ने किया है बिल्कुल नहीं यह पहले से खुद समाज के सिपल हारों ने इंसान को इंसान में भेद अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए किया।

 अंतिम बात भारत में तीन भारत नहीं केवल एक भारत जिसमें समता ,स्वतंत्रता,बंधुता व न्याय स्थापित करने की बात कही गई है, जो भारतीय संविधान के प्रस्तावना में वर्णित हैं ।प्रतिनिधित्व का पैमाना सामाजिक व शैक्षिक रूप से पिछड़ापन है ना कि आर्थिक। अनुसूचित जाति व जनजाति का व्यक्ति कितना भी बड़ा अफसर भी बन जाए लेकिन उसे संबोधित असंवैधानिक शब्दों से करते आए हैं ।इतनी असमानताओ के बावजूद आरक्षण में पुनर्विचार की आवश्यकता कह रहे हैं ।यह बड़ी विडंबना है। देश संकट के दौर से गुजर रहा है और आप आरक्षण की समस्या को लेकर कठोर फैसले लेने की ओर इशारा कर रहे हैं ।यह आरक्षित वर्गों के प्रति आपकी अनुचित मानसिकता को प्रदर्शित करती है।
vinodkumar160788@gmail.com