Monday, August 10, 2009

लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिये महिलाओं कि भुमिका का संवर्धन


लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिये महिलाओं कि भुमिका का संवर्धन

"लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिये महिलओं कि भुमिका का संवर्धन" विषय पर 8-10 जुलाई 2009 के बीच एक कार्याक्रम होटल आदित्य, रायपुर मे संपन्न हुआ. इस कार्याक्रम मे छत्तिसगढ़ के विभिन्न जिलों से लगभग 60 महिलाओं ने भाग लिया. यह कर्याक्रम यू.एन. डेफ के सहयोग से सेंटर फॉर सोशल रिसर्च, नई दिल्ली और सोशल इंस्टिट्यूट फॉर रिसर्च, स्टडी एंड एक्शन, छत्तिसगढ़ के संयुक्त तत्वधान मे हुआ.

 

इस कार्याक्रम मे राष्टीय स्तर के राजनीतिक दल जैसे कॉग्रेस, भजपा, बसपा के अलावा आरपीआई, राजद, लोजपा, ससैद के प्रदेश स्तर के महिला पदाधिकारियों ने भाग लिया. इसके अलावा कई निर्दलीय महिला राजनीतिक ने भी इस कार्याक्रम मे हिस्सा लिया. बैठक मे राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विभा राव ने भी भाग लिया. मुख्य वक्ताओं मे शोभा यादव, हेमलता साहु, सरित गजिबिये, चित्रलेखा साहु, रीति देशलहरा, राजिम तांडी, सुधा कसार, ब्रिन्दा अजाद, विधादेवी साहु, ललित सुरजन, जयमाला मंडराहा, अनिता रावटे और अनिता सुर्यवंशी थे. बैठक का संचालन अंजु दुबे और दुर्गा झा ने किया.

 

कार्याक्रम के पहला सत्र मे "लोकत्रांत्रिक प्रक्रिया मे महिलाओं की स्थिति" विषय पर लम्बी चर्चा हुई. सभी वक्ताओं ने लोकतंत्रिक मे पुरुषप्रधान सामाजिक व्यवस्था का वर्चस्वा एवं महिलाओं  की दुरदशा को दर्शाया. दूसरे दिन के सत्र मे "वर्तमान परिपेक्ष मे महिला आरक्षण का सवाल" विषय पर वक्ताओं ने अपनी राय रखी. कई  वक्ताओं ने 50% आरक्षण पर जोर दिया और दलित-आदिवासी महिलाओं के लिये विशेष स्थान की बात भी रखी. इसके लिये लंबी लडाई लडने पर जोर दिया. "दलगत राजनीति मे महिलाऐं" विषय पर सहभागियों ने मंच, माइक, मनि, मसिल, माफिया, माला, मीडिया पॉवर का उपयोग कर पुरुष दलगत राजनीति को कब्जा किये हुऐ हैं. ऐसे संदर्भ मे आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और आत्मबल की आवश्यक्ता है. "मीडिया, राजनीति और महिला" विषय पर ललित सुरजन ने कहा कि, जहॉ स्वच्छ मीडिया नही होगी, वहॉ का लोकतंत्र भी कुलीनो के हाथो मे होगा. उन्होने प्रतिभागियों को मास मीडिया के साथ-साथ परमपरागत मीडिया के सदुपयोग कर जनोनमुखी राजनीति की सलाह दी. तीसरे दिन "अपनी समझ अपनी बात" सत्र मे प्रतिभागियों ने अपने- अपने राजनीतिक अनुभव को सामने रखा. महिलाओं ने ऐसे कई कटु अनुभव सामने रखे जिसका विवरण करना असंभव है.  बैठक के अंतिम सत्र मे महिलओ ने आनेवाले समय के लिये कार्यायोजन भी तैयार की है.

 
दुर्गा झा