Saturday, April 14, 2012

दलित मुव्हमेन्ट ऐसोशियेशन कि ओर से बाबा साहेब डा अम्बेडकर जयंती कि लाखो बधाईयां।


जय भीम साथियों
आज हमें यह बतलाते हुए अत्यंत खुशी हो रही है कि आज से लगभग ५ वर्ष पहले शुरू किया गया यह प्रयास जो अति दलित जातियों को जागृत करने का उद्देश्य पर केन्द्रित था, आज पूरे देश में एक जाना पहचाना नाम है। दलित मुव्हमेन्ट ऐशोसियेशन का गठन ४ अगस्त २००६ को कुछेक ४-५ सदस्यों के साथ किया गया। हमने एक ऐसे प्लेटफार्म का निर्माण किया जहां सभी पिछड़ी जातियां एवं दबे कुचले वर्ग के लोग मिलकर अपने विचारों का आदान प्रदान कर सके। वर्तमान में हम डोमार, हेला, मखियार, वाल्मीकि आदि अति पिछड़ी दलित जातियों में सामाजिक चेतना का संचार करने के लिए प्रयासरत है।
इस संस्था के प्रारंभिक सोपान में हमने गुगल में एक ग्रुप का निर्माण किया जिसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ये 5000 से ज्यादा सदस्यों वाला देश का सबसे बड़ा समूह है। इस समय हमने इसका ब्लाग प्रारभ किया www.dalit-movement-association.blogspot.com इसमें दलित साहित्य से संबंधित किताबों की जानकारी १० किश्तों में प्रकाशित की गई। कई पुस्तक समीक्षाएं एवं दलितों के हित संबंधी जानकारी समय समय पर प्रकाशित होती रहती है। यह ब्लाग एवं ग्रुप आज देश का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला ग्रुप है। इस गु्रप के दो मैनेजर निरंतर प्रबंधन का कार्य करते है। १. विनोद चारवंडे पुणे २. संजीव खुदशाह रायपुर।
इस संस्था ने मानव  अधिकार संस्थाओं के सहयोग से रायपुर, बिलासपुर एवं नागपुर में दलित हित पर कई कार्यक्रम कार्यशालाओं का आयोजन करावाया है। जिनमें दलित वकीलों का सेमीनार भी शामिल है।
इसके बाद सन २०१० में इसका विधिवत पंजीयन किया गया। इस प्रकार दलित मुव्हमेंन्ट ऐसोसियेशन अपने अधिनियम धाराओं सहित मजबूत संस्था का रूप ले लिया। परंपरानुसार संस्था का वार्षिक कार्यक्रम १४ अप्रैल को किया जाता है।
इसी बीच संस्था की कुछ उपलब्धियों से मै आपको अवगत कराना जरूरी समझता हू। पहला ये कि हमने क्ड। का अपना free sms service प्रारंभ किया है। जिसमें हम जरूरी सूचनाएं, शोध, समाचार आदि प्रेषित करते है। इस SMS का लाभ लेने हेतु आपको JOIN DMAINDIA लिखकर 09219592195 पर SMS करना है। इसके बाद आपको हमेशा बिना किसी शुल्क के एस.एम.एस. प्राप्त होता रहेगा। दूसरी उपलब्धि यह है कि हमने अपने ब्लाग में फ्री मेट्रीमोनी सेवा की शुरूआत कि, ताकि दलित समाज के लोग विवाह हेतु आसानी से रिश्ते तलाश कर सके।
तीसरी उपलब्धी यह है कि हमने राजधानी में अपने समाज का सामाजिक भवन हेतु भूमि की तलाश पूर्ण की। अभी इस भूमि को प्राप्त करने हेतु शासन स्तर पर कार्य प्रगति पर है। आशा करते है कि शीघ्र ही हम अपना अगला कार्यक्रम अपने भवन पर करेगे।
अंत में मै अपने सभी सामाजिक बन्धुओं से अनुरोध करूंगा की आईये, बाबा साहेब डॉ.अम्बेडकर के बताए रास्ते पर चले यही एक मात्र रास्ता है हमारे उज्जवल भविष्य का। संगठित हुए बिना विकास संभव नही है और संगठन हेतु तन-मन-धन की आवश्यकता होती है। यदि अपने समाज को उंचाई पर देखना चाहते हो तो समाज के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान करे। पादर्शिता हमारा संबल है अत: वार्षिक आय-व्यय की आडिट रिर्पोट हम अपनी पत्रिका दलित उत्थान में प्रकाशित करते है। आशा है यह प्रयास एक सकारात्मक सोच में सहायक होगा।
*संजीव खुदशाह*