Wednesday, September 27, 2017

जाति उन्मूलन आंदोलन का अखिल भारतीय सम्मेलन 13-14 जनवरी 2018 को नागपुर में


पुना पैक्ट विरोध दिवस के दिन नागपुर में सम्मेलन के लिए आयोजन समिति का गठन

रायपुर 26 सितंबर 2017। जाति उन्मूलन आंदोलन का अखिल भारतीय सम्मेलन 13,14 जनवरी 2018 को नागपुर में होगा। इस दो दिवसीय अखिल भारतीय सम्मेलन के योजनाबद्ध आयोजन के लिए जाति उन्मूलन आंदोलन से जुड़े नेतृत्वकारी बुद्धिजीवियों की एक आयोजन समिति का नागपुर में 24 सितंबर को पुना पैक्ट विरोध दिवस के दिन एक वृहद बैठक में गठन किया गया। एक जाति विहिन, वर्ग विहिन समाज की रचना के लिए जाति उन्मूलन आंदोलन देशभर में अपनी गतिविधियों को विस्तार दे रहा है। नागपुर में हुई बैठक की अध्यक्षता साथी जिंदा भगत ने की। बैठक में प्रमुख वक्ता के रूप में जाति उन्मूलन आंदोलन के राष्ट्रीय कार्यकारी संयोजक एवं प्रख्यात लेखक साथी संजीव खुदशाह (छत्तीसगढ़) उपस्थित थे। अन्य वक्ताओं में साथी बंडू मेश्राम, साथी रतन गोंडाने (छत्तीसगढ़), टीयू सी आई के नेता साथी प्रवीण नाडकर (मुंबई) साथी अरूण वेलासकर, साथी दिनेश कुचेकर (पुणे), साथी देवराव (नांदेड़) व साथी चितले गुरूजी, साथी लीना बागड़े, साथी यशवंत तैलंग, साथी योगेश ठाकरे व साथी आशीष घोष ने अपनी बात रखी। कार्यक्रम का संचालन जाति उन्मूलन आंदोलन की केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य तथा विकल्प अवाम का घोषणापत्रपत्रिका के संपादक साथी तुहिन ने किया। कार्यक्रम में जबलपुर के प्रख्यात रंगकर्मी व क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच (कसम) की केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य साथी समर सेनगुप्ता ने जन गीत प्रस्तुत किया। जाति उन्मूलन आंदोलन के अखिल भारतीय सम्मेलन की आयोजन समिति में साथी जिंदा भगत (अध्यक्ष) तथा अन्य सदस्यगण - साथी संजीव खुदशाह, साथी बंडू मेश्राम, साथी प्रवीण नाडकर, साथी दिनेश कुचेकर (पूणे), साथी देवराव (नांदेड़), साथी यशवंत चितले गुरूजी, साथी लीना बागड़े, अनिल बोरकर, रतन गोंडाने (छत्तीसगढ़), रमेश आशीष बीजेकर, यशवंत तेलंग, योगेश ठाकरे, जगदीश साखरे, मनोहर राऊत, साथी सुरेन्द्र शुक्ला, सुशीला टाकभांवरे, सचिन बागड़े (पुणे), हरीश जाबोलकर, नेवालाल पात्रे, कृष्णा कांबले (पालघर), नईम भाईपटेल, प्रदनेश सोनावणे (थाणे), संजय पवार (अहमदनगर) हैं। 


बैठक में वक्ताओं ने एक मत से कहा कि जाति व्यवस्था भारत में एक भयंकर बीमारी की तरह है। लेकिन भारत का शासक वर्ग इसे कोई समस्या नहीं मानता। एक जातिविहिन वर्ग विहिन समाज की स्थापना के लिए जाति उन्मूलन आंदोलन पिछले 5 वर्ष से देश में सक्रिय है। देश में महाराष्ट्र सहित करीब 12 राज्यों में जाति उन्मूलन आंदोलन की राज्य इकाई सक्रिय है। इसका मुखपत्र हिंदी में ’’जाति उन्मूलन’’ व अंग्रेजी में ’’cast annihilation’’ सफलतापूर्वक प्रकाशित की जा रही है। इसका अखिल भारतीय सम्मेलन नागपुर में आगामी 13,14 जनवरी 2018 को आयोजित होने जा रहा है। नागपुर एक तरफ तो अंबेडकरी आंदोलन ब्राम्हणवाद विरोधी आंदोलन का गढ़ है तो दूसरी ओर प्रतिक्रियाशील ताकतों ब्राम्हणवादी ताकतों का केन्द्र भी है। इसीलिए नागपुर में जाति उन्मूलन आंदोलन का अखिल भारतीय सम्मेलन, ब्राम्हणवादी मनुवादी सांप्रदायिक फासीवादी ताकतों के खिलाफ एक हल्लाबोल कार्यक्रम होगा। भारत में करीब ढ़ाई दशक से नवउदारवाद का राज चल रहा है और निजीकरण-उदारीकरण-भूमंडलीकरण के चलते उत्पीड़ित वर्गों और मेहनतकश समुदायों विशेष रूप से दलितों की हालत बद से बदतर होते गई है। वर्तमान में पिछले 3 वर्षों से भी अधिक समय से देश में सत्ता पर काबिज धुर दक्षिणपंथी सांप्रदायिक फासिस्ट ताकतों ने चैतरफा नफरत का जहर फैलाने का अभियान चला रही है। इनके द्वारा राजस्थान, हरियाणा, बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, झारखण्ड व महाराष्ट्र में दलितों, आदिवासियों व अल्पसंख्यकों पर हमले की अनेक वीभत्स घटनाएं घटी हैं। कट्टर हिंदूत्ववादी ताकतें एक तरफ तो बाबा साहब आंबेडकर को हथियाने की कोशिश में है तो दूसरी ओर विश्वविद्यालय परिसरों में छात्र-छात्राओं के खिलाफ दमनात्मक रवैया अख्तियार कर रही है। गौमांस, लवजिहाद, आदि फितूरों की आड़ में लोगों के भोजन, पहनावा को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। शासक वर्ग द्वारा एक तरफ तो कार्पोरेट ताकतों को पूरा लाभ पहुंचाया जा रहा है तो दूसरी ओर गरीब, आमजनता को और बदहाल बनाया जा रहा है। बैठक में नागपुर सहित महाराष्ट्र के विभिन्न जगहों से जाति उन्मूलन आंदोलन व दलित आंदोलन से जुड़े विभिन्न संगठनों के कार्यकत्र्ता व बुद्धिजीवीगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।