Wednesday, December 12, 2018

International human rights day seminar at raipur

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस की 70वीं वर्षगांठ पर

आज के दौर में मानवाधिकार आन्दोलन का महत्त्व पर परिचर्चा संपन्न

रायपुर 10 दिसम्बर 2018 |

*पीस रायपुर व छत्तीसगढ़ नागरिक संयुक्त संघर्ष समिति (CNSSS) द्वारा* अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस की 70वीं वर्षगांठ पर “आज के दौर में मानवाधिकार आन्दोलन का महत्त्व” पर परिचर्चा आज राजधानी रायपुर में वाई.एम.सी.ए. प्रोग्राम सेंटर में आयोजित की गई |

छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी 1857 के विद्रोह शहीद वीर नारायण सिंह को कार्यक्रम में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया | 

कार्यक्रम में अध्यक्षता प्रख्यात लेखक संजीव खुदशाह ने की | 

कार्यक्रम में आधार वक्तव्य क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच (कसम), पीस रायपुर व ‘विकल्प आवाम का घोषणापत्र’ के संपादक तुहिन देब ने “हिरासत व जेलों में घुटता भारतीय जीवन” नामक आलेख के ज़रिये प्रस्तुत किया | 

दलित मुक्ति मोर्चा के संयोजक एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. गोल्डी एम. जॉर्ज, भिलाई के ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता जयप्रकाश नायर ने इस अवसर पर अपना उद्बोधन दिया| 

इनके अलावा डॉ. बिप्लव, डॉ. प्रवीर चटर्जी, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मजदूर कार्यकर्ता समिति की श्रेया, उर्मिला देवी, भा.क.पा. (माले) के राज्य सचिव कॉ. सौरा आदि ने भी इस अवसर पर अपनी बात रखी | कवयित्री शिवानी मोइत्रा ने मानवाधिकार पर कविता, भिलाई की संस्कृतिकर्मी समीक्षा नायर एवं नाचा थिएटर के संयोजक निसार अली ने जनगीत प्रस्तुत किया | संचालन अखिल भारतीय क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन के संयोजक विनय ने किया |

वक्ताओं ने कहा कि 1945 में दुसरे विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद उपनिवेशवाद – साम्राज्यवाद से मुक्ति, आज़ादी, शांति, समानता व समाजवाद के पक्ष में दुनिया की अधिकांश जनता इकट्ठे होने लगी | ऐसी ही परिस्थिति में मानव के मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) की अगुवाई में 10 दिसम्बर 1948 को अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस घोषणापत्र अस्तित्व में आया |

मानवाधिकार प्रत्येक मानव का जन्मसिद्ध अधिकार है | अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस की 70वीं वर्षगांठ पर मानवाधिकारों के प्रति बढ़ती जागृति के बावजूद तस्वीर का बदरंग पहलू है मौजूदा परिस्थिति में कॉर्पोरेट फासीवादी राज में मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन | छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश में अघोषित आपातकाल है तथा पुलिस, सशस्त्र बलों व निरंकुश कानूनों के ज़रिये धार्मिक कट्टरपंथ व जल – जंगल – ज़मीन की कॉर्पोरेट लूट के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों को जेल, यातना और यहां तक कि शारीरिक रूप से समाप्त कर खामोश किया जा रहा है | जनवादी अधिकारों की बहाली व संरक्षण के लिए तमाम संघर्षशील, प्रगतिशील व जनवादी ताक़तों को एकजुट होकर आवाज़ उठानी पड़ेगी | 

कार्यक्रम में भीमा – कोरेगांव घटना के नाम पर गिरफ्तार तमाम मानवाधिकार कार्यकर्ताओं व बुद्धिजीवियों को रिहा करने की तथा भीमा – कोरेगांव घटना के  मास्टरमाइंड संघ के प्रचारक मिलिंद एकबोटे व सम्भाजी भिड़े को तत्काल गिरफ्तार करने की तथा दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों, मेहनतकशों व महिलाओं पर हो रहे दमन पर रोक लगाने हेतु प्रस्ताव पारित किए गए |

आभार छत्तीसगढ़ नागरिक संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक अखिलेश एडगर ने किया | 

सभा में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए हस्ताक्षर – पोस्टकार्ड अभियान चलने का निर्णय लिया गया | 

संगोष्ठी में बड़ी संख्या में विद्यार्थी – बुद्धिजीवी व जनसंगठनों के लोग उपस्थित थे |
Tuhin