डॉ. संजीव कुमार

मांस, मदिरा, महिला और मुद्रा के इर्द गिर्द ही मर्दों का जीवन घूमता नज़र आता हैं. महिला इसमें सबसे बड़ी वस्तु हैं, जैफ्री एपस्टीन ने यह साबित कर दिया है.एपस्टिन की फाइल में अभी और कितने राज खुलने हैं मालूम नहीं, अमेरिकी समाचार सूत्रों से प्राप्त हो रहा है कि उससे हासिल 35 लाख फाइलों में से अभी सिर्फ 5 लाख फाइलों को ही सार्वजनिक किया गया है. जिससे कि पूरे विश्व में एक हलचल मची हुई है. अभी इन फाइलों के जरिए जिन बड़े-बड़े लोगों के नाम सामने आ रहे हैं उनमें में जो सबसे बड़ा नाम है वह है वर्तमान में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, दुनिया भर में कंप्यूटर का साम्राज्य फैलाने वाले बिल गेट्स, अपने कला से दुनिया को दीवाना बनाने वाले माइकल जैक्सन, अमेरिका के कई जाने-माने राष्ट्रपति, इजराइल के पूर्व राष्ट्रपति,प्रिंस एंड्रयु,मनो वैज्ञानिक नओम चोसकी ,अरब देशों के सुल्तान और व्यापारी, मशहूर फिल्मकार मीरा नायर तथा दुनिया भर के नामचिन व्यापारी, अभिनेता, राजनेता इत्यादि.ये वो लोग है जो विश्व की राजनीति ,सत्ता ,अर्थव्यवस्था तय करते है .
एपिस्टिन ने लगभग 20 साल तक दुनिया के जाने-माने लोगों के ऐयाशी की व्यवस्था की और संसार का सबसे बड़ा “हैवान “ बन कर दुनिया को हिला दिया . एक साधारण परिवार से आने वाले जेफरी एपस्टीन ने अमेरिका के पास एक आइलैंड ख़रीदा जिसका नाम लिटिल सेंट जेम्स है . इस आइलैंड पर उसने दुनिया के ताक़तवरों को एक साथ लाने और व्यवस्था तय करने के लिए बना रखा था . जहाँ इनके ऐसो –आराम के लिए छोटी बच्चियां परोसी जाती थी . इस आईलैंड पर वह लोगों को अपने निजी विमान से ले जाता था जिसका नाम लोलिता एक्सप्रेस रखा गया था. इस आईलैंड पर लड़की और महिलाओं को ले जाने का कार्य उसकी पार्टनर और गर्लफ्रेंड गिस्लेन मैक्सवेल करती थी. जो अभी उम्र कैद की सजा काट रही है. मैक्सवेल के पिता दुनिया के सबसे खतरनाक जासूसी संस्था ‘मोसाद’ के जासूस थे. इस फाइल को इस कड़ी से भी जोड़कर देखा जा रहा है. इन दोनों के इस घृणित कार्य का पता दुनिया को तब चला जब वर्जीनिया गेउफ्रे ने अपनी किताब नो बॉडी गर्ल्स के माध्यम से इनका खुलासा किया था जो स्वयं एपस्टीन का शिकार हो चुकी थी.इन्होंने meeto आंदोलन से 2019 में सबका ध्यान खिंचा था. जिसके बाद एपस्टीन को गिरफ्तार किया गया और जहां जेल में ही उसके आत्महत्या करने का पता चला . वही 2025 में ट्रम्प के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के 3 महीने पश्चात् गेउफ्रे की भी संदिग्ध रूप से मौत हो गई.
एपस्टीन हैवान बन चुके इन रईसों के शौक पूरे करने के लिए 8 से लेकर 14 साल तक की छोटी-छोटी बच्चियों को इन बूढ़ों के हवाले परोसता था. न जाने इन बच्चियों के गोश्त की कीमत पर दुनिया के कैसे-कैसे फैसले किए गए ,इसका जवाब तो आने वाला कल ही बता पाएगा . समुद्र के बीचो-बीच कुछ एकड़ में फैले हुए इस भूमि पर अरबो रुपए से बने “हैवानों” की सेवा के लिए ही यह विलासिता का भवन बनाया गया था . यहां पर देश और दुनिया से बहला – फुसलाकार,किडनैप कर इन छोटी-छोटी बच्चियों को ले जाया जाता था. इन बच्चियों के साथ यह बुड्ढे निर्वस्त्र होकर हफ्तों तक हैवानियत का खेल खेलते थे. अपनी बूढ़ी हड्डियों को नशे में धुत करके ये बुड्ढे इन फूल जैसी मासूम बच्चियों के गोश्त को नोचते थे. यह छोटी बच्चियां ना यहां से भाग सकती थी न हीं इनका यहां से कोई चीख सुनने वाला होता था. कल्पना करके देखिए इन छोटी बच्चियों पर क्या बितती होगी. इनका जिस्म नोंचने वाले ऐसे- ऐसे लोग थे जिन्हें पूरी दुनिया में आदर और अदब के लिए जाना जाता है . पर इन लोगों ने ऐसे कुकर्म करने से पहले एक बार भी नहीं सोचा, और भला सोचते भी क्यों क्योंकि वह ये जानते थे कि वह जो बोलते हैं ,जो कहते हैं, जो करते हैं वहीं इस संसार का नियम होता है. वें ही इस संसार के ईश्वर है .अभी कुछ दिन पहले लल्लनटॉप पर एक बहस हुई थी जिसका विषय था ‘क्या गॉड है ?’ मै समझता हूँ उसका सबसे बेहतर जवाब है यह फाइल . सच कहूं तो ऐसे ही घटनाओं से मेरे नास्तिक होने की प्रबलता और बढ़ जाती है.
नब्बे के दशक में जापान में 44 दिन के नर्क की घटना को आपको एक बार जरुर पढना चाहिए , भारत में फूलन देवी का सामूहिक बलात्कार भी उसी प्रकार की एक घटना है , इसके अलावा आज तो विश्व और भारत में हर दिन औरतों – बच्चियों के साथ ऐसे हादसे देखने को मिलती रही है मसलन अजमेर सेक्स स्कैण्डल,खैरलाँजी हत्याकांड, और 2025 में प्रज्वल रेवन्ना के हजारों सेक्स वीडियो,ये औरतों के साथ होने वाली ऐसी क्रूरता की घटनाए है जिनसे साधारण मनुष्य का ह्रदय कांप जाए . अभी पिछले साल ही निठारी हत्याकांड का निर्णय आया था जिसमें प्रमुख दोषियों को निर्दोष करार दें कर बरी कर दिया गया है. आप सबको याद होगा 2004 -5 में नोएडा के निठारी बंगले के पास एक नाले में दर्जनों लड़कियों और बच्चों के नर कंकाल मिले थे. इस मामले ने देश भर में सुर्खियां हासिल की थी. घटना का जिस तरह से जिक्र देखने को मिल रहा था लोगों के कलेजे काँप जा रहे थे. और आज 20 साल बाद जब उसका निर्णय हुआ तो उस घटना का कोई अपराधी हमारे सामने नहीं मिला. फिर सवाल यह आता है कि आखिर उन लड़कियों का अपराधी कौन है? आज दिल्ली में प्रतिदिन 54 लड़कियां और बच्चे गायब हो रहे हैं? मध्य प्रदेश में लड़कियों के गायब होने पर बीबीसी ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसके अनुसार प्रतिदिन यहाँ से 43 बच्चे और महिलाए गायब हो रही है. आज देश भर में हर साल लगभग बासठ हजार लड़कियां गायब होती जा रही हैं. आखिर यह लड़कियां और बच्चियां जा कहां रही है ? इस अपराध के पीछे कौन है? और सबसे बड़ा सवाल कि हमारी पूरा तंत्र इतने बड़े अपराध को कैसे खामोशी से देख रही है?
महिलाएं और लड़कियां हमेशा से ही दुनिया में शिकार होती रही है. राजतंत्र व्यवस्था में जब एक राजा दूसरे राज्य पर आधिपत्य प्राप्त करता था तब वहां जो जिंदगी सबसे दूभर होती थी वह लड़कियों की ही होती थी. कबीलाई समाज में भी लड़कियां और महिलाएं खरीदी और बेची जाती थी. और अब सभ्य समाज कहे जाने वाले लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस लोकतांत्रिक व्यवस्था को चलाने वाले हैवान ‘ बच्चियों और महिलाओं के साथ इस तरह की क्रूरता खुलेआम कर रहे हैं और हमारा सभ्य समाज उनका कुछ नहीं बिगाड़ पा रहा. आज जब देश में किसी महिला के साथ बलात्कार होता है तब पूरे शहर को महीनों जाम करना पड़ता है. तोड़फोड़ की जाती है तब जाकर उस अपराधी को गिरफ्तार किया जाता है. आखिर महिलाओं के सम्मान के लिए हमारी व्यवस्था इतनी निष्ठुर कैसे हैं?
एपस्टीन फाइल अभी दुनिया के और भी राज खोलने वाले हैं. पर जैसे-जैसे इसकी परत खुलती जा रही है. रुह को कपा देने वाले वीडियो और सूचनाए देखने को मिल रही हैं. पूरी दुनिया में इस पर हर घंटे लिखे और पढ़े जा रहें हैं. आखिर किस प्रकार इस दुनिया को नियंत्रित करने वाले यह लोग एक आईलैंड पर इकट्ठा होते थे और बच्चियों को नोंचते थे. कुछ वीडियो तो ऐसे भी आ रहे हैं जिनके हवाले से बताया जा रहा है कि ये हैवान इन बच्चियों का मांस तक खाते थे. अब हमारे लोकतांत्रिक व्यवस्था के सामने सवाल यह है कि वे लोग जो इस फाइल से जुड़े हुए हैं जो अब इस धरती पर नहीं है और वे लोग जो अभी भी सत्ता तथा साम्राज्य पर बने हुए हैं उनके साथ हमें क्या सलूक करना चाहिए?
क्या हमारी लोकतांत्रिक दुनिया में यह ताकत है की इन हैवान मनुष्यों को उनके कुकर्मों के अनुसार सजा दें सके? और इन लोगों के द्वारा जो देश तथा दुनिया के संदर्भ में नियम बनाए गए, प्रयोग हुए, खोजे हुई तथा फैसले हुए उनका खुलासा हो पाएगा, और यदि इनका खुलासा हो पाएगा तो उससे संबंधित लोगों को किस प्रकार से सजा दी जाएगी? क्योंकि इसी प्रकार जूलियनअसांजे ने भी अपनी फाइलों के जरिए एक दशक पहले दुनिया हिला दी थी. और बाद में दुनिया को चलाने वाले लोगों ने उस फाइल को ही फर्जी घोषित कर दिया और असांजे को जेल की सजा दें दी गई.
जाहिर है इन बड़ी-बड़ी फाइलों और सुर्खियों से कुछ महीने इन ताकतवर लोगों को हम थोड़ा कमजोर भले कर दें पर सच्चाई यही है कि हम इनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते. आज एक साधारण मनुष्य इन लोगों के लिए इनके प्लेट में सजने वाले चिकन से ज्यादा कुछ नहीं हैं.

डॉ. संजीव कुमार
सहायक प्रोफेसर
श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भिलाई
(सामाजिक एवं राजनीतिक विशेषज्ञ )





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