Wednesday, October 17, 2012

कांशीराम के बहाने दिखाई दलित एकजुटता

दैनिक भास्कर भिलाई से प्रकाशित
कांशीराम के बहाने दिखाई दलित एकजुटता


विभिन्न प्रांतों के दलितों को एक करने की मुहिमराज्य में निवास कर रहे अलग-अलग प्रांतों के दलितों को एकजुट करने एक बड़ी मुहिम शुरू हो गई है। दलित मूवमेंट एसोसिएशन के बैनर तले आयोजन किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में एक प्रमुख आयोजन दो दिन पहले सेक्टर-6 के डॉ. अंबेडकर सांस्कृतिक भवन में कांशीराम की पुण्यतिथि पर हुआ। जिसमें भिलाई स्टील प्लांट व अन्य सार्वजनिक कंपनियों के अफसरों सहित भिलाई में निवासरत विभिन्न प्रांतों के दलित प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दी। 
दलितों को एकजुट करने छत्तीसगढ़ स्तर पर विविध आयोजन के लिए 15 विभिन्न संस्थाओं ने मिलकर कैलेंडर तैयार किया है। जिसमें दलितों से जुड़े मुद्दों पर राज्य के विभिन्न शहरों में कार्यक्रम शुरू हुए हैं। इस एकजुटता को आगामी लोकसभा-विधानसभा चुनावों से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। आयोजक भी इससे इंकार नहीं कर रहे हैं। 
आयोजन की श्रृंखला में 'हमारे महापुरुषों की विरासतÓ कार्यक्रम में बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक दिवंगत कांशीराम को लोगों ने याद किया और भारतीय समाज व्यवस्था को बदलने के उनके योगदान की सराहना की। मुख्य अतिथि बीएसपी के जीएम एल. उमाकांत ने कहा कि स्व. कांशीराम का उद्देश्य देश के 85 फीसदी जनसंख्या को एकजुट करना था। उन्होंने अपने त्याग और आचरण से इसमें सफलता पाई। अपने संस्मरण सुनाते हुए बीएसपी के विधि अधिकारी टी. दास ने कहा कि जब स्व.कांशीराम ने डॉ. अम्बेडकर की पुस्तक 'एनहिलेशन ऑफ कास्टÓ को 7 बार पढ़ा तो उनका जीवनदर्शन बदल गया। बीएसपी के डीजीएम एफ. आर. जनार्दन ने 1978 के रामनामी मेले में उनकी उपस्थिति को याद करते हुए बताया कि गिरौदपुरी मेले के दौरान कसडोल में रूकने की व्यवस्था न होने पर एक बस कंडक्टर के छोटे से कमरे में 10-15 साथियों के साथ, जमीन पर लेटकर रात गुजारने का मार्मिक वृतांत सुनाया। इस अवसर पर पंजाब नेशनल बैंक में कार्यपालक जी डी राउत ने बताया कि लोगों को जोडऩे के लिए स्व. कांशीराम ने भाईचारा बनाओ कार्यक्रम, जाति तोड़ो-समाज जोड़ो, सफाई कामगार आंदोलन, साइकिल रैली आदि अनेक अभियान चलाए। आदिवासी ओमखास समाज के महासचिव किशोर एक्का, बीएसपी के डीजीएम पी. जयराज, सामाजिक कार्यकर्ता विजय कश्यप, विमला जनार्दन, डा. अकिल धर बैनर्जी और प्रवीण कांबले ने भी संबोधित किया। आयोजन में विनोद वासनिक, नरेंद्र खोबरागढ़े, एन. चिन्ना केशवलू, प्रदीप सोमकुंवर, वासुदेव लाउत्रे, दिवाकर प्रजापति, शीलाताई मोटधरे और अरविंद रामटेके सहित अन्य का योगदान रहा।
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'' निश्चित रूप से राजनीतिक मोर्चे पर दलित एकजुटता हमारा सबसे बड़ा मकसद है। आरक्षण में कटौती और जाति प्रमाण पत्र बनाने में आने वाली अड़चनें सहित ढेरों ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर जिनके लिए एक बड़ा आंदोलन खड़ा करना जरूरी है। डॉ. अंबेडकर परिनिर्वाण दिवस पर 6 दिसंबर को हम लोग रायपुर में समूचे प्रदेश से दलित समुदाय को एकजुट करने की तैयारी है। वहां हमारे आंदोलन को नाम भी मिल जाएगा और आगे की मुहिम भी वहीं से शुरू होगी।''
संजीव खुद शाह, आयोजक