Sunday, November 5, 2017

Indian Politics and Patanjali vs Colgate

भारतीय राजनीति और पतंजलि वर्सेस कोलगेट
सचिन कुमार खुदशाह
यदि भारत की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति को समझना होपक्ष और विपक्ष की पार्टियों की स्थिति को समझना होतो पतंजलि और कोलगेट कंपनियों के विज्ञापन के बारे में जानना उससे पहले जरूरी है क्योंकि यदि आप इनके बारे में जान जाएंगे तो आपको भारतीय राजनीति के परिदृश्य के बारे में जानकारी आसानी से मिल पाएगी।
जैसा की आपको मालूम है पतंजलि एक टूथपेस्ट निकाल रहा है ‘दंत कांति’ जिस का विज्ञापन बड़े जोर शोर से किया जा रहा है। इसमें वह आयुर्वेदिक शक्ति को प्रमुख रुप से प्रचार कर रहे हैं। और विदेशी केमिकल वाले टूथपेस्‍ट से खबरदार रहने की सहाल दे रहे है। अब आप इसे भारतीय जनता पार्टी मान ले थोड़ी देर के लिए।
दूसरी ओर कोलगेट अपने एक नये प्रकार का टूथपेस्ट उत्‍पादित किया है। जिसका नाम दिया है ‘वेद शक्ति’, और इसे बड़े जोर शोर से इसे पतंजलि टूथपेस्ट के विरुद्ध उतारकर प्रचार किया जा रहा है। आपसे विपक्षी पार्टी के रूप में देख सकते हैं। कांग्रेस पार्टी भी मान लेगे तो गलत न होगा।
इस दोनों प्रोडक्ट में एक खास बात कॉमन है। वह यह की दोनों प्रोडक्ट अपने आप को स्‍वदेशी के नाम पर हिंदुत्व के रूप में दिखाना चाहती है। पतंजलि यह बताना चाहती हैं कि उनका प्रोडक्ट शुद्ध रुप से भारतीय है जिसे मैं खुले शब्दों में कहें तो हिंदुत्ववादी है। वह इसी का आड़ लेकर आयुर्वेद को प्रचार करते हैं कि आयुर्वेद सारे विज्ञान का जड़ है। दरअसल इन का मकसद आयुर्वेद का प्रचार करना या हिंदुत्व का प्रचार करना नहीं है। इनका मकसद है हिंदुत्व की आड़ में अपने प्रोडक्ट को बेचकर बड़ा मुनाफा कमाना है। ऐसा पहले भी विदेशी कम्‍पनियां करती रही है ये कोई नई बात नही है।
कोलगेट थोड़ा पीछे ही सही वह भी साफ्ट हिंदुत्व को लपकने की कोशिश में है। हांलाकि वह टूथपेस्‍ट निर्माताओं में सबसे पुरानी एवं बड़े ग्राहको वाली कम्‍पनी रही है। दरअसल वह अपने नए प्रोडक्ट के माध्यम से पतंजलि द्वारा लगाए जा रहे विदेशी के आरोप को झूठलाना चाहती है। इसी कड़ी में उन्होंने अपना जो नया टूथपेस्ट का उत्पादन क्या है। उसका नाम रखा है ‘वेद शक्ति’। कोलगेट को यह भ्रम है कि ऐसे ग्राहक जो कट्टर हिंदुत्व वादी विचारधारा के हैं। वह उनके प्रोडक्ट को हाथों- हाथ लेंगे और कॉलगेट मार्केट में अपने उत्‍पाद को बनाये रखने में कामयाब हो पाएगा। जब की यह कोलगेट का एक बहुत ही बड़ा भ्रर्म है।
क्योंकि हिंदुत्व को लुभाने के लिए पहले ही पतंजलि अपने प्रोडक्ट निकाल रही हैं। और वे पहले से ही उनसे प्रोडक्‍ट खरीद रहे हैं। कोलगेट अपने वेद शक्ति टूथपेस्‍ट के माध्यम से उन्हें नहीं लुभा सकती। बावजूद इसके कोलगेट ऐसे प्रोडक्ट निकालती है। तो इसके दो कारण हो सकते हैं पहला कोलगेट अपने विदेशी होने की छवि को सुधारना चाहती हैं दूसरा वह आयुर्वेद के नाम पर अपने प्रोडक्ट को जिंदा रखना चाहती हैं।
जबकि चाहिए यह था कि कोलगेट नए वैज्ञानिक तथ्यों के साथ मार्केट में उतरती और यह बताती की नए-नए इजाद के आधार पर उनका टूथपेस्ट क्यों ज्यादा उपयोगी है तो उसकी पहुंच कहीं बड़े ग्राहकों तक होती और वह पतंजलि के ग्राहकों को भी अपनी ओर खींच सकती थी। लेकिन कोलगेट के इस विज्ञापन को देखने के बाद उस पर बड़ी दया आती है। कोलगेट यहां एक मासूम बेवकूफ की तरह दिखती है और ऐसा लगता है कि उसके पास और कोई और चारा नहीं है। बिल्कुल दिमागी दिवालियापन की तरह। भारतीय उपभोक्ताओं की भी बड़ी परेशानी है क्योंकि उसके पास कोई ऑप्शन नहीं है। पतंजली का मकसद दंत कांति‍ के माध्‍यम से कोलगेट के ग्राहक को अपनी ओर खीचना। जबकि कोलगेट बचाव की मुद्रा में है। मान लिजीये ग्राहक के लिये ये दो ही विकल्‍प हो तो मजबूरी में कहें या स्वाभाविक तौर पर लोग पतंजलि के टूथपेस्ट की ओर ही आकर्षित होंगे और हो रहे हैं। या फिर कोई दूसरा विकल्‍प ढूंढेगे।
दरअसल आज के भारतीय राजनीति की यही स्थिति है एक भारतीय जनता पार्टी है जो उग्र हिंदुत्व को बढ़ा रहे है तो दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी है जो कि साफ्ट हिंदुत्व को आगे बढ़ा रही है। ऐसी स्थिति में आम भारतीय वोटरों के पास चुनने के लिए दो ही ऑप्शन है और निश्चित तौर पर कहे या प्राकृतिक तौर पर हिंदूवाद को पसंद करने वाले लोग भाजपा को ही पसंद करेंगे। याने कांग्रेस पार्टी का सॉफ्ट हिंदुत्व के आधार पर सफाया होना निश्चित है। अथवा लोग नये आप्‍सन की तलाश करे्गे।
जबकि हो ना यह था कि कांग्रेस एक प्रगतिशील, गैर सांप्रदायिक वैज्ञानिक विचारधारा वाली पार्टी के रुप में सामने आती लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। यही कारण है। ऐसी स्थिति में कम्‍युनिष्‍ट एवं अंबेडकरवादी पार्टियां अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। यदि यह दोनों विचारधाराएं भी सांप्रदायिकता के राह पर चलेंगी तो उनका भी यही हश्र होना निश्‍चित है।
इन नई विचारधाराओं के सामने चुनौती इस बात की होगी कि वह किस प्रकार प्रगतिशील वैज्ञानिक गैर सांप्रदायिक विचारधारा को लेकर आगे बढ़ सके क्योंकि भारत की आम जनता को दो वक्त की रोटी, रहने को घर और शांत वातावरण चाहिये। चाहे वह किसी भी धर्म व संप्रदाय को मानने वाला हो। लेकिन भारत की जनता की मजबूरी यह है कि उसके पास दूसरा मजबूत ऑप्शन नहीं है। मुझे लगता है कि भारत का विपक्ष कम से कम कोलगेट की तरह नहीं चलेगा न ही अपने मानसिक दिवालियापन का परिचय देगा मैं आशान्वि‍त हूं।

सचिन कुमार खुदशाह
बिलासपुर

09907714746