Friday, March 25, 2011

दलित साहित्य-दलित चेतना व हिन्दी साहित्य पर विचार गोष्ठी

दलित चेतना व हिन्दी साहित्य पर विचार गोष्ठी

पिछले दिनों मायाराम सुरजन फाउण्डेशन द्वारा ''दलित चेतना एवं हिंदी साहित्य`` विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। युवा दलित लेखक एवं सामाजिक कार्यकर्ता संजीव खुदशाह ने इस विषय पर विस्तार पूर्वक आलेख प्रस्तुत किया जिस पर उन्होने कहा की दलितों में आई सामाजिक चेतना एवं दलित चेतना में जमीन आसमान का फर्क है। अच्छे साफ कपड़े पहनना, विलासिता के वस्तु का संचय करना उच्च पदो में पहुचने का दंभ भरना समाजिक चेतना है किन्तु दलित चेतना इन सबसे परे अपने इतिहास को पहचानना, अपने शोषको की संस्कृति का तिरस्कार करना एवं डा. आम्बेडकर की विचार धारा का पालन करना है। श्री संजीव खुदशाह यह मानते है कि दलित साहित्य के केवल विचारात्क साहित्य का सृजन गैर दलित कर सकते है लेकिन वे सृजनात्मक साहित्य का सृजन वे नही कर सकते क्योकि यह वही लिख सकता है जिसने उस दंश को भोगा है। युवा विचारक तुहीन देब ने कार्यक्रम आयोजन की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर लेखक एवं समीक्षक डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव ने कहा की सवर्ण लेखक के द्वारा दलित साहित्य पर लिखी गई रचनाओं को सिरे से नकार देने के मै पक्ष में नही हूं अमृतलाल नागर, प्रेमचंद, नागार्जुन, हृदेयश जैसे लेखको ने इसी तरह की रचनाए लिखी है। उन्होने कई पौराणिक उदाहरण भी प्रस्तुत किये। दूरदर्शन के केन्द्र निदेशक टी.एस. गगन ने अपने उदबोधन में कहा की संजीव खुदशाह ने एक ज्वलंत विषय पर गंभीर बहस का मौका दिया है, उनके तर्क,  उनकी सहमती-असहमती पूर्वागह से परे है। वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजन ने कहा की इसी फाउण्डेशन से संजीव खुदशाह की पहली किताब ''सफाई कामगार समुदाय`` का  लोकार्पण किया गया था आज वे दूसरी बार इस मंच पर अतीथि के रूप में आमंत्रित है। आज दलित साहित्य अपनी सहमती असहमती के बीच से गुजर रहा है ऐसे वक्त कई दलित लेखक रंजनापूर्ण साहित्य का लेखन कर रहे है ऐसे दौर में संजीव खुदशाह जैसे दलित लेखक समग्र दृष्टिकोण से लिख रहे है ये एक अच्छी बात है। विख्यात समाज चिंतक डॉ. डी.के.मारोठिया ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की एवं दलित चेतना को रेखांकित करते हुए अपना उद्बोधन दिया। सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता एम.बी.चौरपगार ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये। कार्यक्रम में गुलाब सिंह, गिरीश पंकज सदस्य साहित्य आकादमी, प्रदीप आचार्य , श्रीमति कौशल्यादेवी खुदशाह, शाबाना आजमी, सोनम, मोतिलाल धर्मकार, कैलाश खरे आदि बड़ी संख्या में प्रबुध्दजन उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन फाउण्डेशन के सचिव राजेन्द्र चांडक ने किया।

प्रस्तुति
सचिन कुमार

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