Thursday, April 21, 2011

न्याय की कसौटी पर साहित्यीक चोरी


o       विजय राज बौध्द
हाल ही में मुझे ओमप्रकाश वाल्मीकि की पुस्तक सफाई देवता पढ़ने का अवसर मिला। सामाजिक कार्यकर्ता एवमं दलित मुक्ति मोर्चा का कनवीनर होने के कारण मेरी रूचि दलित साहित्य में रही है। इसके पूर्व मैंने वर्ष २००५ में राधाकृष्ण प्रकाशन से प्रकाशित संजीव खुदशाह की पुस्तक सफाई कामगार समुदाय पढ़ी थी। ये दोनो ही पुस्तके मूलत: भंगी समुदाय पर केन्द्रित हैं। मुझे यह बताते हुए बड़ा क्षोभ हो रहा है कि सवर्ण लेखकों की तथ्यों की चोरी जैसी कुप्रवृत्तियां दलित लेखकों में भी दिखाई पड़ने लगी है ।
ओमप्रकाश वाल्मीकि की सद्य: प्रकाशित पुस्तक सफाई देवता में कई सारे तथ्य २००५ में प्रकाशित संजीव खुदशाह की पुस्तक से लिये गये हैं और इस पुस्तक का संदर्भ भी नहीं दिया गया है। मेरी नजर में निम्नानुसार कई तथ्य हैं, जो सीधे-सीधे सफाई कामगार समुदाय से लिये गये हंै।
सफाई देवता के पृष्ठ क्रमांक-५० पर ओम प्रकाश वाल्मीकि लिखते हैं-
''डॉ. विमल कीर्ति की भी इसी तरह की मान्यता है कि सुपच सुदर्शन ऋषि और कोई नही सुदर्शन नाम के बौध्द श्रमण थे। नागपूर के आसपास अनेक लोग (भंगी समाज)`` सुदर्शन को अपना गुरू मानते है। पालि भाषा के अनेक ग्रन्थों में सुदर्शन नामक एक बौध्द भिक्षु का जिक्र आता है।``
यह तथ्य डॉ विमल कीर्ति से संजीव खुदशाह की बातचीत के दौरान सामने आया था, जिसे उन्होने अपनी किताब ''सफाई कामगार समुदाय`` में पृ. क्र. ७६ परं लिया हैं।
इसी प्रकार पृष्ठ क्रमांक ५७ 'सफाई देवता` में १९१० की जनगणना के कमिश्नर की रिपोर्ट में अछूतों के लक्षण बताए गए है।
''१. जो ब्राम्हणो की प्रधानता नही मानते।
२. जो किसी ब्राम्हण अथवा अन्य किसी माने हुए गुरू से मन्त्र नही लेते
३. जो वेदों को प्रमाण नही मानते
४. जो हिन्दू देवी-देवताओं को नही पूजते
५. जो हिन्दू मन्दिरों में नही जा सकते है।``
इन पर करीब १२ लक्षणो पर गहन विवेचना संजीव खुदशाह की किताब में प्रस्तुत की गई है, जिसके अंश तोड़ मरोड़ कर यहां प्रस्तुत किया गया है। ठीक इसी प्रकार पृ.क्र. ७९ 'सफाई देवतामें लिखा गया है।
''छिटकी-बुंदकी के आधार पर इनकी शादी-विवाह तय होते है। छिटकी-बुदकी में इनके मूल निवास और देवी-देवताओं की जानकारी मिलती है। छिटकी-बुंदकी न मिलने से रिश्ते नही बनते। इनमें 'जसगीत` गाने की एक विशिष्ट  शैली पाई जाती है।``
किताब ''सफाई कामगार समुदाय`` (देखे पृ.क्र.-९५) के पृ.क्र. ११० में छिटकी बुंदकी पर पूरा का पूरा एक उप-अध्याय है उसी में से उक्त अंश को तोड़ मरोड़ कर उदधृत किया गया है। छिटकी बुंदकी पर संजीव व्दारा विवेचना की गई है तथा निष्कर्ष निकाले है उसी निष्कर्ष को उपर लिख दिया गया है। इसी प्रकार नाभाजी का जिक्र पृष्ठ क्रमांक १३३ ( सफाई देवता ) में दिया गया है जिसका संदर्भ पहली बार किताब ''सफाई कामगार समुदाय`` में आया था।
''सफाई कामगार समुदाय`` पुस्तक के पृष्ठ क्रमांक १३७ में विभिन्न राज्यों के सफाई कामगारों के जाति नाम दिये गये है। इसी सूची में थोड़ा बहुत संशोधन करते हुए श्री ओमप्रकाश वाल्मीकि व्दारा अपनी किताब में पृष्ठ क्रमांक १४७ पर प्रस्तुत किया गया है। उनका यह कृत्य साहित्यिक अथवा प्राकृतिक न्याय की कसौटी पर एक ओछा कार्य है। उनसे अपेक्षा थी कि वे  बताते कि ये सारे तथ्य वे कहां से उठाएं है शायद इससे उनका मान और बढ़ जाता। वे ये भी बताते की डॉ. विमल कीर्ति से सुदर्शन ऋ़षी के बौध्द श्रमण होने का तथ्य वे कहां से लिए है। शायद वे जगह-जगह पुस्तक ''सफाई कामगार समुदाय`` का जिक्र करने में शर्मिदगी महसूस कर रहे होगंे अथवा वे फासीवादियों की तरह दूसरों की उपलब्धि को चट कर जाना चाहते है। इस प्रकार कई जगह पर संजीव की किताब से निकाले निष्कर्षों को बहुत ही आसानी से इस किताब में ले लिया गया है। शायद वे किताब के शुरू में आयी कापीराईट की चेतावनी को पढ़ना भूल गये।
पूरे किताब में श्री ओम प्रकाश वाल्मीकि व्दारा श्री संजीव खुदशाह अथवा उनकी किताब ''सफाई कामगार समुदाय`` का जिक्र किये जाने से बचने की कोशिश स्पष्ट नजर आती है। किताब में केवल एक जगह पृष्ठ क्रमांक ७६ में संजीव खुदशाह का जिक्र किया गया है वह भी एक साक्षात्कार की रिपोर्टिग के सम्बन्ध में।
एक वरिष्ठ साहित्यकार व्दारा ऐसा किया जाना उनके साहित्यक बौनेपन की निशानी है। जब दलित आंदोलन तेजी से आगे बढ़ रहा है, उस वक्त श्रेय लेने की होड़ में कुछ लोग ऐसे कृत्य भी करेगें, यह अकल्पनीय था। बेहतर होता प्रतियोगिता एवं ईष्या की भावना से उपर उठकर वे एक मौलिक कृति देते, जो सामाज को रास्ता दिखाने के काम आती।
ओमप्रकाश वाल्मीकि जैसे वरिष्ठ लेखक से ऐसी अपेक्षा तो कतई नही थी। यह एक निन्दनीय कृत्य है जिसकी जितनी भी भर्त्सना की जाये कम है।
(विजय राज बौध्द)
३१/१० लोकमान्य, गोल चौक रोहणीपुरम,
रायपुर (छ.ग.) ४९२००१
            संपादक (जनक्रान्तिदूत)
            प्रदेश महासचिव, छत्तीसगढ़ जनजाति छात्र एवं युवा संगठन
            राष्ट्रीय महासचिव, अखिल भारतीय दलित संघर्ष सेना