डॉ संजीव खुदशाह
यह गीत जैसे ही बजता लोग समझते कि इस गीत को मधुबाला गा रही है। वह फीलिंग और जज्बात इस गीत में पिरोए गए हैं की आज भी लोग उनके गीतों को सुनकर रोमांचित हो जाते हैं भावुक हो जाते हैं। आज आशा भोसले हमारे बीच नहीं है। 93 वर्ष की आयु में उनका देहांत हो गया। प्रसंगवश यहां बताना जरूरी है कि 8 सितंबर 1933 को उनका जन्म हुआ था तथा 1948 में उन्होंने अपना पहला गीत सावन आया फिल्म चुनरी के लिए गाया था। उनके गायकी की जबरदस्त रेंज थी। ऐसी महिला पार्श्व गायिका बॉलीवुड में अब नहीं है। वह एक तरफ डिस्को, रॉक एण्ड रौल के गाने गाती थी तो दूसरी तरफ गजल, भजन को अपनी गंभीर आवाज देती। कई साधारण गाने को अपनी असाधारण आवाज देकर अमर बना दिया। एक तरफ वे मधुबाला के लिए अच्छा जी मैं हारी चलो मान जाओ ना गाती है तो दूसरी तरफ उर्मिला मातोंडकर के लिए तन्हा तन्हा यहाँ पे जीना जैसा रैंप गाना गाती है। उन्हें सात बार प्लेबैक का फिल्म फेयर अवार्ड मिल चुका है। फिल्म उमराव जान के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला है। उनके योगदान को देखें उनकी आवाज और उनकी आवाज की लचक को देखें तो यह सारे पुरस्कार बौने से नजर आते हैं। सबसे बड़ा पुरस्कार है लोगों के दिल में अपनी जगह बनाना। आज वह करोड़ों भारतीयों के दिल में बसी हुई है और एशिया की सबसे प्रसिद्ध गायिका का खिताब उनके नाम है।
उन्होंने अपनी बहन लता मंगेशकर के निज सचिव गणपतराव भोसले से प्रेम विवाह किया लेकिन यह विवाह टिक ना सका तीन बच्चों के साथ वह फिर अपने मायके वापस आ गई। फिल्मी दुनिया में अपना जी जान लगा दिया और गायकी के क्षेत्र में एक मुकाम हासिल किया। बाद में उन्होंने संगीतकार राहुल देव बर्मन से दूसरा विवाह कर लिया था जो अंतिम समय तक बना रहा।
फिल्म संगीत, पॉप, गज़ल, भजन, भारतीय शास्त्रीय संगीत, क्षेत्रीय गीत, कव्वाली, रवींद्र संगीत और नजरूल गीत इनके गीतों में सम्मिलित है। इन्होंने 14 से ज्यादा भाषाओं में गीत गाए यथा– मराठी, आसामी, हिन्दी, उर्दू, तेलगू, मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी, भोजपुरी, तमिल, अंग्रेजी, रशियन, नेपाली, मलय और मलयालम। कहा जाता है कि 12000 से अधिक गीतों को आशा जी ने आवाज दी। महान पार्श्व गायक किशोर कुमार आशा जी के सबसे मनपसंद गायक थे।
एक समय था जब बॉलीवुड में गीता दत्त, शमशाद बेगम और लता मंगेशकर की तूती बोलती थी। किसी और पार्श्व गायिका की एंट्री लगभग नामुमकिन थी। ऐसी स्थिति में आशा भोंसले को बहुत संघर्ष करना पड़ा। पहले तो वह केवल बी या सी ग्रेड के फिल्मों के लिए ही गाना गाती थी। 1952 की फिल्म संगदिल से उन्होंने प्रसिद्धि पाई और बॉलीवुड में पांव जमाना शुरू कर दिया। उसके बाद उन्होंने कभी पीछे पलट कर नहीं देखा। फिल्म काला पानी का गीत अच्छा जी मैं हारी चलो मान जाओ ना मोहम्मद रफी के साथ गाकर उन्होंने इतिहास रच दिया। उसके बाद फिल्म कारवां, उमराव जान, तीसरी कसम से लेकर रंगीला तक में उन्होंने अपने जलवे बिखेरे। वह एक ऐसी गायिका थी जो अपने समय से आगे के मॉडर्न गीत गाती थी। 72 वर्ष की आयु तक पार्श्व गायन करने का उनका रिकॉर्ड है। उनके नाम 2011 में 11000 से अधिक गाना गाने का गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड है जिसे अब तक कोई नहीं तोड़ पाया।
वैसे तो वह बहुत समय पहले गीत गाना बंद कर चुकी थी। कुछ रियलिटी शो में ही दिखाई पड़ रही थी, बावजूद इसके उनका जाना बॉलीवुड के लिए अपूर्णीय क्षति है और उन लोगों के लिए एक झटका है जो संगीत से प्यार करते हैं।





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